परियों की कहानियाँ | Hindi Fairy Tales Story
बहुत समय पहले की बात है, एक छोटे से गाँव में एक गरीब लेकिन नेकदिल पति-पत्नी रहते थे। उनके पास न तो ज़्यादा पैसा था, न बड़ी ज़मीन, लेकिन उनके दिल में एक बड़ी इच्छा थी — एक प्यारी सी बच्ची। हर रात वे भगवान से यही दुआ करते कि उनके घर भी एक दिन खुशियों की किलकारी गूंजे।
आख़िरकार उनकी प्रार्थना सुन ली गई — पत्नी गर्भवती हुई। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसे एक अजीब-सी इच्छा सताने लगी। उसके घर के पास एक ऊँची दीवार से घिरा जादुई बग़ीचा था, जो एक भयानक जादूगरनी का था। उस बग़ीचे में “रॅपुन्ज़ेल” नाम की हरी-भरी सब्ज़ी उगती थी — इतनी ताज़ा, इतनी चमकदार कि बस उसे देखकर ही किसी के मुँह में पानी आ जाए।
एक दिन पत्नी ने खिड़की से झाँकते हुए कहा,
“सुनो जी, उस बग़ीचे की सब्ज़ी को देखकर मेरा दिल ललचा गया है। अगर मैं वो ‘रॅपुन्ज़ेल’ नहीं खाऊँगी, तो मुझसे रहा नहीं जाएगा।”
पति घबरा गया — “पर वो तो जादूगरनी का बग़ीचा है!”
पत्नी की आँखों में आँसू आ गए — “अगर तुम सच में मुझसे प्यार करते हो, तो मेरे लिए वो रॅपुन्ज़ेल ले आओ।”
बेचारा पति अपनी पत्नी की हालत देखकर राज़ी हो गया। रात के अंधेरे में वह दीवार फाँदकर बग़ीचे में पहुँचा और धीरे से कुछ रॅपुन्ज़ेल की पत्तियाँ तोड़ लीं।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था। अगले दिन जब वह फिर सब्ज़ी लेने गया, तो जादूगरनी वहीं खड़ी थी!
वह दहाड़ उठी — “कैसे हिम्मत हुई मेरी बग़ीचे में आने की!”
काँपते हुए पति ने कहा, “कृपया मुझे माफ़ कर दीजिए! मेरी पत्नी गर्भवती है और वही सब्ज़ी खाने की ज़िद कर रही थी।”
जादूगरनी ने ठंडी मुस्कान के साथ कहा,
“मैं तुम्हारी पत्नी की जान नहीं लूँगी… लेकिन जो बच्ची जन्म लेगी, वह मेरी होगी।”
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डर के मारे पति कुछ बोल नहीं पाया। और जब बच्ची पैदा हुई, जादूगरनी आकर उसे उठा ले गई। उसने बच्ची का नाम रखा — रॅपुन्ज़ेल।
रॅपुन्ज़ेल बड़ी होकर बेहद सुंदर, मासूम और कोमल स्वभाव की लड़की बनी। उसके लंबे, सुनहरे बाल ऐसे चमकते जैसे सूरज की किरणें बिखर गई हों।
लेकिन जादूगरनी को डर था कि कोई उसे उससे छीन न ले। इसलिए उसने रॅपुन्ज़ेल को एक बहुत ऊँचे टावर में बंद कर दिया। वहाँ न कोई दरवाज़ा था, न सीढ़ी — सिर्फ एक छोटी-सी खिड़की।
जब जादूगरनी ऊपर जाना चाहती, तो वह आवाज़ लगाती —
“रॅपुन्ज़ेल, अपने सुनहरे बाल नीचे लटकाओ!”
और रॅपुन्ज़ेल अपने लंबे बाल नीचे कर देती, जिससे जादूगरनी ऊपर चढ़ जाती।
एक दिन पास के जंगल से एक राजकुमार गुज़र रहा था। उसने टावर से आती रॅपुन्ज़ेल की मधुर आवाज़ सुनी। वह ठहर गया — उस गीत में ऐसी मिठास थी कि उसका दिल वहीं ठहर गया।
अगले कुछ दिनों तक वह रोज़ उसी जगह आता और दूर से उसका गीत सुनता। एक दिन उसने देखा कि जादूगरनी कैसे ऊपर चढ़ती है। उसने मन ही मन तय किया — “कल मैं भी यही करूँगा।”
अगले दिन वह हिम्मत जुटाकर बोला,
“रॅपुन्ज़ेल, अपने सुनहरे बाल नीचे लटकाओ!”
रॅपुन्ज़ेल को लगा कि जादूगरनी आई है, उसने बाल नीचे किए। लेकिन ऊपर आया राजकुमार!
वह घबरा गई, “तुम कौन हो?”
राजकुमार मुस्कुराया, “मत डरो, मैं बस तुम्हारा गीत सुनकर खिंचा चला आया।”
धीरे-धीरे दोनों में बातें होने लगीं, हँसी-मज़ाक हुआ, और जल्द ही वे दोस्त बन गए।
समय बीता और दोस्ती ने जगह ले ली प्यार की।
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लेकिन एक दिन जादूगरनी को सब पता चल गया। उसका चेहरा ग़ुस्से से लाल हो गया। उसने चीखते हुए कहा,
“तूने मुझे धोखा दिया, रॅपुन्ज़ेल!”
और क्रोध में उसके लंबे सुनहरे बाल काट दिए। फिर उसे दूर, घने जंगल में अकेले छोड़ दिया।
अगले दिन जब राजकुमार आया, तो जादूगरनी ने वही बाल नीचे लटकाए। राजकुमार ऊपर चढ़ा — लेकिन ऊपर पहुँचते ही जादूगरनी ने उसे ज़ोर से धक्का दे दिया!
राजकुमार नीचे काँटों में गिरा और उसकी आँखों की रोशनी चली गई।
महीनों तक वह अंधा होकर जंगल-जंगल भटकता रहा। उसे बस रॅपुन्ज़ेल की आवाज़ याद थी — वही मधुर गीत।
एक दिन उसने वही आवाज़ फिर सुनी — वही गीत, वही मिठास।
वह आवाज़ की दिशा में चला और आखिरकार रॅपुन्ज़ेल के पास पहुँचा।
रॅपुन्ज़ेल उसे देखकर रो पड़ी। उसने उसे गले लगाया, और उसके आँसू राजकुमार की आँखों पर गिरे।
अचानक एक चमत्कार हुआ — राजकुमार की आँखों की रोशनी लौट आई!
दोनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
राजकुमार उसे अपने महल ले गया, और वहाँ उन्होंने शादी कर ली।
अब रॅपुन्ज़ेल एक ऊँचे टावर की कैदी नहीं रही — वह बन गई एक आज़ाद, खुश और दयालु रानी।
वे दोनों हमेशा दूसरों की मदद करते और प्यार से अपना जीवन बिताते रहे।
शिक्षा:
सच्चा प्यार कभी हार नहीं मानता। वह कठिनाइयों और दूरी से भी मजबूत होता है, और अंत में हमेशा जीतता है।




